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मैं

सब कुछ तो है मेरे पास फिर भी ये खालीपन सा क्यों है,
कुछ तो कमी है , हां शायद मेरे पास मैं ही नही हूँ ।
चेहरे पर हँसी भी है, मुस्कुराहट है पर कुछ कमी सी है,
हां, शायद वो दिल से आने वाली खिलखिलाहट नही है, शायद मेरे पास मैं ही नही हूँ ।
दोस्त है, हँसी- ठिठोलियाँ है, महफ़िलें भी है ,फिर भी एक अकेलापन है ,
शायद वो पहले जैसी सच्ची बेपरवाह यारियां नही है ।
शायद अब मेरे पास मैं ही नही हूँ ।

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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