तेरे शहर का अज़ब दस्तूर है,
हर इंसान यहां कितना मजबूर है ।
एक मकान में तो रहते है,
दिलों से बहुत दूर है ।
बनावटी है चेहरे, रिश्ते कितने कमजोर है ।
प्यार का तो बस नाम का ही शोर है,
पल पल मरता है प्यार बस अहम ने थामी डोर है
©️ काव्या शेखर

तेरे शहर का अज़ब दस्तूर है,
हर इंसान यहां कितना मजबूर है ।
एक मकान में तो रहते है,
दिलों से बहुत दूर है ।
बनावटी है चेहरे, रिश्ते कितने कमजोर है ।
प्यार का तो बस नाम का ही शोर है,
पल पल मरता है प्यार बस अहम ने थामी डोर है
©️ काव्या शेखर
