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किस्मत

सुन-सुन कर थक गया कि,
क़िस्मत से ही सब मिलता है,
तू व्यर्थ ही भाग रहा नामुमकिन मंज़िलों के पीछे । आख़िर मैंने भी दिल मे ठानी ,
नही चलने दूंगी क़िस्मत की मनमानी,
पूरा करके दिखाऊंगी ,जो दिल मे है ठानी।
रात-दिन दिन-रात करता रहूँगा कोशिशें,
देखना एक दिन क़िस्मत बनाने वाला ,
ख़ुद आकर कहेगा, जा ले जा अपनी क़िस्मत ।

   
    ©️ काव्या शेखर
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चाहत

चाहत पे किसी का ज़ोर चलता नही ,तुम्हे देखकर ये दिल सम्भलता नही ।हज़ार कोशिशें करके देखी,पर कम्बख़त ये दिल है कि बहलता नही ।

©️ काव्या शेखर

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अकेला

ऐ दोस्त, तेरे इस शहर की चकाचौंध में ,
दिलों में अंधेरा है,
लाखों की भीड़ में भी हर शक्स अकेला है ।

©️ काव्या शेखर

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मुमकिन नही

मुमकिन नही तुझे भूल जाना,
मेरा ज़रा ज़रा तुझसे बना है ।
नामुमकिन है तेरे वजूद को मुझमें से मिटाना,
मेरे हर कतरे – कतरे में तू बहता है ।

©️ काव्या शेखर

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दोस्त

दुनियां के भीड़ में कुछ लोग ऐसे मिलते है ,
बेगाने होकर भी अपनों से बढ़कर लगते है । मुश्किलों की दौड़ में साथ-साथ चलते है,
ज़िन्दगी के गुलशन में ख़ुशबू बनकर महकते ही । कभी धुंधले से नज़र आये रास्ते तो,
उन रास्तों पर रौशनी बनकर बिखरते है।
किस्मत से ऐसे लोग मिलते है ,
जिन्हें हम सच्चा दोस्त कहते है ।

©️ काव्या शेखर

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तन्हा

इस भागती दौड़ती जिन्दगी में फ़ुरसत ही न
मिली,
की कोई खुद के अंदर झाँक कर देखे की वो कितना तन्हा है ।

©️ काव्या शेखर

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क्यों करते है प्यार

ना जाने प्यार में क्यों होता है ऐसा हाल,
हर मोड़ पर खड़े हो जाते है कितने सवाल । जानते है की हर मोड़ पर मिलेंगें आंसू और दर्द , फिर भी ना जाने क्यों हम करते है प्यार ,
कैसा जादू है इसका ना जाने कैसा है जाल ।

©️ काव्या शेखर

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हिन्दुस्तानी

ये जाती पाती के फेर में तू क्यों बंदे पड़ता है,
उसने ही (ख़ुदा) जब फर्क किया ना तू क्यों पगले करता है ।
खोल समझ के पर्दे अपने देख चालें कोई चलता है,
हमको लड़वाता आपस मे अपना उल्लू सीधा करता है ।
आओ मिल कर खाए कसम ,ना जलने देंगे अपना वतन,
हम है भारत जो हर मंदिर ,हर मस्ज़िद में बसता है,
जो हर दिल मे रहता है ,ना है हिन्दू ना मुसलमान,
हम है बस हिन्दुस्तानी जो अपने वतन पे मरता है । 🇮🇳🇮🇳🇮🇳♥️

©️ काव्या शेखर

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रुबरु

गुज़रे तेरी गली से हर बार ये सोचकर,
तुम कभी तो मिलोगे किसी मोड़ पर ।   

©️ काव्या शेखर 

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बेताब

पाके तुझे बेताब लगे है ,
ये कैसी हक़ीक़त है जो ख़्वाब लगे है ।

©️ काव्या शेखर

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