डरने की कोई बात नहीं जब हम सब एक साथ है ।
ना कोई हिन्दू है ना मुसलमान, ना कोई सिक्ख ना ईसाई ,डट कर खड़े है सब कोरोना की इस जंग में भाई – भाई । हर बड़ी से बड़ी मुश्किल जाएगी हार जब हम सब एक साथ है ।
Stay safe, stay home, stay positive
©️ काव्या शेखर

डरने की कोई बात नहीं जब हम सब एक साथ है ।
ना कोई हिन्दू है ना मुसलमान, ना कोई सिक्ख ना ईसाई ,डट कर खड़े है सब कोरोना की इस जंग में भाई – भाई । हर बड़ी से बड़ी मुश्किल जाएगी हार जब हम सब एक साथ है ।
Stay safe, stay home, stay positive
©️ काव्या शेखर

तेरे हर एक झूठ पर भी है एतबार हमें,
ख़ुद से भी ज्यादा तुम पर है ऐतबार हमें।
मिट जाएंगे हुए जो दूर तुम हमसे,
इस क़दर है तुमसे प्यार हमें ।
©️ काव्या शेखर
दोस्ती नाम है हमारा कैसे हमें भुलाओगे,
हम आएंगें हमेशा याद जहाँ भी जाओगे ।
दोस्त तो बहुत मिल जायेंगें ,
पर हमारे जैसा कहां से लाओगे ।
खुद को अकेला मत समझना कभी,
जब भी बुलाओगे कही भी होंगें चले आएंगें ।
साथ न रहे फिर भी,
याद बनकर हमेशा तेरे होंठों पे मुस्कान बनकर आयेंगें।
©️ काव्या शेखर
रुकना न कभी यार, बढ़े चलों,
मंज़िल तेरे कदमों में होगी बाहों में आसमान , चले चलो, बढ़े चलो ।
होगी न तेरी हार चले चलो,
मेहनत तेरी ताक़त है और हिम्मत तेरा यार, मंजिल तुझको मिल जाएगी जोश बना हथियार , चाहे चुनौतियों का हो पहाड़ ,
होकर निडर कर उसपे तू वार,
बढ़ता जा तु ,चलता जा तू हो जाएगा पार , डरता है ,डरता है क्यों , जब रब है तेरे साथ । बढ़े चलो ,चले चलो ।
सबको सीखो अपनाना ,जीत हो या हार, छोड़ के तू तू मैं मैं सारी , कर सबसे तू प्यार , होगी जीत मोहब्बत की, नफ़रत जाएगी हार,
कर्म तू अपना करता जा,जीवन को कर साकार ।
डरता है , डरता है क्यों, जब रब है तेरे साथ ।
बढ़े चले ,चले चलो
©️ काव्या शेखर
सोचा था सो जायेंगें ,
याद से तेरी कुछ पल की आज़ादी मिल जाएगी,
पर कमबख्त तूने ख्वाबों मे भी रिहाई ना दी ।
तुम एक तेज़ हवा के झोंके की तरह ,
आये और आकर चले गए,
हम ख़ामोश तेरा आना और जाना देखते रहे, सोचा था जब मिलोगे तो ,
कर देंगें हाल-ए-दिल बयां,
पर जब सामने आए तुम ,
सब कुछ आंखों में छुपा के रह गए ।
©️ काव्या शेखर
ज़िन्दगी में तुम बिन नही कुछ ख़ास,
तेरे सिवाय कुछ भी आता न रास ।
अब तो बस दो ही चीजें है मेरे पास,
पहली तेरी याद दूसरी तुमसे मिलने की आस ।
©️ काव्या शेखर

जिन्दगियां फनाह हो जाती है ,
घर को घर बनाने में ।
नफरत के ठेकेदारों ने चंद लम्हात भी ना लगाया,
उसे राख़ बनाने में ।
©️ काव्या शेखर

कभी चलती कभी रुकती कभी दौड़ती सी जिंदगी
कही ग़म तो कही खुशियाँ बाँटती सी ज़िन्दगी ।
कही बिगाड़ती तो कही बनाती सी ज़िन्दगी,
हर पल हर लम्हा कुछ नया सिखाती सी ज़िन्दगी
©️ काव्या शेखर
आप सबको होली मुबारक । Be happy & Be safe

नफ़रत को घोलो दोस्ती और प्यार के रंग में,
ऐसे तुम मनाना होली,
तन से रंग भले ही उतरे,
मन से अच्छाई का रंग ना तुम उतरने देना,
ऐसे तुम मनाना होली ।
भेद – भाव ना रहे दरमिया ,
ना मजहब की हो दीवार ,
ऐसे तुम मनाना होली ।
दिल ना किसी का दुखने पाए,
खुशियों और मोहब्बत के रंग से,
रंग दो सारा जहां,
ऐसे तुम मनाओ होली ।
©️ काव्या शेखर