
ख़ामोशी

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।


मां जमीन है तो आप आसमान हो,
हम सबका अभिमान हो।
उंगली पकड़कर चलना सिखाया,
लड़खाते क़दमों को हौसला दिखाया।
आपसे ही सीखा छोटा हो या बड़ा सबका सम्मान करना,
मुश्किलें कैसी भी हो उनसे डटकर लड़ना।
आपसे ही सीखा है बिना रुके बिना थके बस अपना कर्म कर,
बाकी दुनियां क्या कहती है,क्या करती है इसकी फ़िक्र ना कर।
कितनी भी मुश्किल हो आप अकेले ही सब सह जाते,
हमें किसी चीज़ की कमी ना हो, अपनी इच्छाओं को पल पल मारते।
हम ज़िंदगी में मुश्किलों से लड़ पाए,आगे बढ़ पाए ,
इसलिए कभी कभी सख़्त बनने की कोशिश भी करते है।
पर हमें पता है सबसे नज़रे बचाकर,
कहीं आंख के किसी कोने में एक कतरा आंसू भी रखते है।
नाकामयाबी पे भी पीठ थपथपाते है,
और कहते है कोशिशों में ही तो जीत है।
कभी हारना कभी जीतना,
ये ज़िन्दगी की रीत है।
मां से ज़िंदगी मिली है तो,
जीने का सलीका आपसे सीखा है,
मां से बिना शर्तों के प्यार, तो ज़िंदगी की मुश्किलों से
हिम्मत से लड़ना आपसे सीखा है ।
जुबां से कुछ कहते नहीं कभी,
मां जीतना प्यार आप भी हमसे करते है।
हमारी पहचान, हमारा स्वाभिमान ही आप,
मां जमीन तो हमारा सारा आकाश हो आप।
© काव्या शेखर

“जिस सुकून-ए-दिल को,
ढूंढ़ते रहे होकर दर-बदर,
वो कमबख़्त छुपा बैठा था,
किसी कोने में मेरे ही अंदर”
© काव्या शेखर
दिलों में उज़ाले हो तो अंधेरे कैसे भी हो मिट जायेंगें,
अगर सोच हो उजली तो काली सोच को भी उजला बना जायेंगें।
भले ना चढ़ा पाए मंदिर और काबें पर चढ़ावा, चलकर किसी गरीब का चूल्हा जला आए,
ना पढ़ पाए आरती या नमाज़ चलो किसी गरीब बच्चे को पढ़ाया जाए ।
चलो मिलकर आपस में खुशियां और प्यार बांटा जाए,
अपने लोगों और अपने देश दोनों का भविष्य उ्ज्वल बनाया जाए।
© काव्या शेखर




