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उज़ाले

दिलों में उज़ाले हो तो अंधेरे कैसे भी हो मिट जायेंगें,
अगर सोच हो उजली तो काली सोच को भी उजला बना जायेंगें।

भले ना चढ़ा पाए मंदिर और काबें पर चढ़ावा, चलकर किसी गरीब का चूल्हा जला आए,
ना पढ़ पाए आरती या नमाज़ चलो किसी गरीब बच्चे को पढ़ाया जाए ।

चलो मिलकर आपस में खुशियां और प्यार बांटा जाए,
अपने लोगों और अपने देश दोनों का भविष्य उ्ज्वल बनाया जाए।

© काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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