इज़हार-ए-मोहब्बत कर दो एक बार फिर से,
वो पुरानी शाम मेरे नाम कर दो एक बार फिर से ।
कुछ लम्हा ठहर जाओ बिना गीले और शिकवों के,
मैं तेरी ख़ूशुबू को कैद कर लूं ताउम्र के लिए एक बार फिर से ।
© काव्या शेखर
इज़हार-ए-मोहब्बत कर दो एक बार फिर से,
वो पुरानी शाम मेरे नाम कर दो एक बार फिर से ।
कुछ लम्हा ठहर जाओ बिना गीले और शिकवों के,
मैं तेरी ख़ूशुबू को कैद कर लूं ताउम्र के लिए एक बार फिर से ।
© काव्या शेखर