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ठहर जाना तुम

“कुछ नज़र आता नहीं, ज़िन्दगी में अंधेरे बहुत है ,ज़िन्दगी में मेरी, सूरज बनके आ जाना तुम ।

ना कोई बोलने वाला, ना कोई सुनने वाला, बस ख़ामोशी है,मेरी ज़िन्दगी में मेरी बकबक बनके आ जाना तुम ।

ना जाने क्यों, इन दिनों कड़वाहट सी बढ़ गई है, ज़िन्दगी में मेरी मिश्री बनकर घुल जाना तुम ।

अबकी जो आओ तो फिर लौट कर जाना ना कभी ,मेरी बाहों में ताउम्र के लिए ठहर जाना तुम”

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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