” ज़िन्दगी में है ना जाने कितने रंग,
कभी हँसाती कभी कर जाती आंखें नम ।
कही खुशियाँ देती है बेशूमार,
कही ग़म के लिए जिंदगी भी पड़ जाती है कम ।
कही दिखती है ये कितनी रंग भारी,
और कही हो जाती है कितनी बेरंग ।”
©️ काव्या शेखर
” ज़िन्दगी में है ना जाने कितने रंग,
कभी हँसाती कभी कर जाती आंखें नम ।
कही खुशियाँ देती है बेशूमार,
कही ग़म के लिए जिंदगी भी पड़ जाती है कम ।
कही दिखती है ये कितनी रंग भारी,
और कही हो जाती है कितनी बेरंग ।”
©️ काव्या शेखर