
कभी कभी मंजिल पर पहुंच कर भी,वो सुकून नहीं मिलता,
जो मंजिलों की तलाश में,रास्तों पे भटकने पे मिलता है ।
इश्क़ के मुकम्मल होने में वो बात कहां ,
जो इश्क़ को पाने की जद्दोजहद में मिलता है ।
©️ काव्या शेखर

कभी कभी मंजिल पर पहुंच कर भी,वो सुकून नहीं मिलता,
जो मंजिलों की तलाश में,रास्तों पे भटकने पे मिलता है ।
इश्क़ के मुकम्मल होने में वो बात कहां ,
जो इश्क़ को पाने की जद्दोजहद में मिलता है ।
©️ काव्या शेखर