Categories
Uncategorized

सुकून

कभी कभी मंजिल पर पहुंच कर भी,वो सुकून नहीं मिलता,

जो मंजिलों की तलाश में,रास्तों पे भटकने पे मिलता है ।

इश्क़ के मुकम्मल होने में वो बात कहां ,

जो इश्क़ को पाने की जद्दोजहद में मिलता है ।

©️ काव्या शेखर

kavyashekhr's avatar

By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started