तू दूर है नज़रों से लेकिन,
सर-ए-बज्म ज़िक्र कोई भी हो,
हर पल हर लम्हा सिर्फ तुम्हे देखते है ।
हम सिर्फ तुम्हे कहते है ।
©️ काव्या शेखर
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तू दूर है नज़रों से लेकिन,
सर-ए-बज्म ज़िक्र कोई भी हो,
हर पल हर लम्हा सिर्फ तुम्हे देखते है ।
हम सिर्फ तुम्हे कहते है ।
©️ काव्या शेखर