Categories
Uncategorized

आंखों की जुबां

कहते है छुपाएं नही छुपते
ये इश्क़ के राज़,

जो लब न कह सके
आंखें कहती है वो बात ।

हमने तो आंखों से
बयां कर दिए हजारों अफ़साने,

वो समझ न पाए आंखों की जुबां ,
या जान कर भी बन बैठे अनजाने ।

©️ काव्या शेखर

kavyashekhr's avatar

By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started