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दुनियां

 

ओ ऊपर वाले !

देख तेरी इस दुनियां का क्या हाल हो गया,

लोगों का हाल बेहाल हो गया ।

अब तो ईमान यहां कौड़ियों में बिकते है,

प्यार और भावनाएं तो सोने चांदी  में तुलते है ।

हर चीज़ का यहां पर मोल है,सच ही तो कहा है दुनियां गोल है ।

इंसान तो इंसान अब तो  लाशों का भी मोल है ,
भाई बन बैठा है भाई का दुश्मन,

अब चारों तरफ़ है बस सिक्कों की ठनठन ।

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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