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चले चलो

रुकना न कभी यार, बढ़े चलों,
होगी न तेरी हार चले चलो,

मंज़िल तेरे कदमों में होगी बाहों में आसमान , चले चलो, बढ़े चलो ।
मेहनत तेरी ताक़त है और हिम्मत तेरा यार, मंजिल तुझको मिल जाएगी जोश बना हथियार , चाहे चुनौतियों का  हो पहाड़ ,
होकर निडर कर उसपे  तू वार,  
बढ़ता जा तु ,चलता जा तू हो जाएगा पार ,  डरता है ,डरता है क्यों , जब रब है तेरे साथ ।  बढ़े चलो ,चले चलो ।

सबको सीखो अपनाना ,जीत हो या हार,      छोड़ के तू तू मैं मैं सारी , कर सबसे तू प्यार , होगी जीत मोहब्बत की, नफ़रत जाएगी हार,
कर्म तू अपना करता जा,जीवन को कर साकार ।
डरता है , डरता है क्यों, जब रब है तेरे साथ ।
बढ़े चले ,चले चलो

   ©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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