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आज़ादी

सोचा था सो जायेंगें ,
याद से तेरी कुछ पल की आज़ादी मिल जाएगी,
पर कमबख्त तूने ख्वाबों मे भी रिहाई ना दी ।


    ©️ काव्या शेखर
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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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