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ज़िन्दगी

कभी चलती कभी रुकती कभी दौड़ती सी जिंदगी
कही ग़म तो कही खुशियाँ बाँटती सी ज़िन्दगी ।
कही बिगाड़ती तो कही बनाती सी ज़िन्दगी,
हर पल हर लम्हा कुछ नया सिखाती सी ज़िन्दगी

    ©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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