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अकेला

ऐ दोस्त, तेरे इस शहर की चकाचौंध में ,
दिलों में अंधेरा है,
लाखों की भीड़ में भी हर शक्स अकेला है ।

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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