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मुमकिन नही

मुमकिन नही तुझे भूल जाना,
मेरा ज़रा ज़रा तुझसे बना है ।
नामुमकिन है तेरे वजूद को मुझमें से मिटाना,
मेरे हर कतरे – कतरे में तू बहता है ।

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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