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नया रंग

ओ रब्बा, तुने मेरी जिंदगी की किताब का
हर पन्ना काली स्याही से क्यों लिखा,
और अभी भी लिखता ही जा रहा ।
बहुत सब्र और हौसला है मुझमे,
मै इंतज़ार करूँगी की , कब तेरी वो काली
स्याही खत्म हो ,
और मेरी किताब के पन्नो पर एक  नया रंग
हो ।

©️ काव्या शेखर

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By kavyashekhr

अल्फाजों का गहरा समंदर हो और डूबकर कही नहीं जाना है बस डूबते जाना है , डूबते जाना है ।

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